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गाइड 01 · 8 मिनट

भारत में फ़्रैंचाइज़ी कैसे काम करती है

फ़्रैंचाइज़ी में आप किसी कंपनी के ब्रांड और तरीके से अपना व्यवसाय चलाते हैं और बदले में शुल्क देते हैं।

फ़्रैंचाइज़ी क्या है

फ़्रैंचाइज़ी एक समझौता है। एक कंपनी, यानी फ़्रैंचाइज़र, किसी दूसरे व्यक्ति, यानी फ़्रैंचाइज़ी, को अपना ब्रांड नाम और काम करने का तरीका इस्तेमाल करने देती है। आउटलेट फ़्रैंचाइज़ी चलाता है और फ़्रैंचाइज़र को भुगतान करता है।

आम तौर पर आउटलेट आपका अपना होता है और पैसा भी आप लगाते हैं। ब्रांड आपको नाम, ट्रेनिंग और माल देता है। व्यवसाय का जोखिम फिर भी आपका रहता है।

भारत में फ़्रैंचाइज़ी के लिए अलग कानून नहीं है। यह एक निजी अनुबंध होता है। इसलिए लिखित एग्रीमेंट ही आपकी सुरक्षा है।

फ़्रैंचाइज़र और फ़्रैंचाइज़ी

फ़्रैंचाइज़र ब्रांड और सिस्टम का मालिक होता है। वह दुकान के रूप-रंग, उत्पाद और सेवा के नियम तय करता है।

फ़्रैंचाइज़ी पैसा लगाता है, स्टाफ रखता है और रोज़ का काम चलाता है। आप ब्रांड के कर्मचारी नहीं हैं। आप मालिक हैं, जो ब्रांड के नियम मानता है।

फ़्रैंचाइज़ी के आम प्रकार

अलग-अलग ब्रांड अलग-अलग ढांचे के लिए अलग नाम इस्तेमाल करते हैं। एक ही शब्द का मतलब अलग कंपनियों में अलग हो सकता है। इसलिए सरल शब्दों में लिखित जानकारी माँगें।

  • यूनिट फ़्रैंचाइज़ी: आप एक आउटलेट चलाते हैं।
  • मास्टर फ़्रैंचाइज़ी: आपको किसी शहर या राज्य के अधिकार मिलते हैं और आप आगे उप-फ़्रैंचाइज़ी बना सकते हैं।
  • FOFO (फ़्रैंचाइज़ी का अपना, फ़्रैंचाइज़ी द्वारा संचालित): आउटलेट आपका है और आप ही चलाते हैं।
  • FOCO (फ़्रैंचाइज़ी का अपना, कंपनी द्वारा संचालित): पैसा आप लगाते हैं, चलाती कंपनी है।
  • COCO (कंपनी का अपना, कंपनी द्वारा संचालित): आउटलेट कंपनी का है और वही चलाती है। यह आपके लिए फ़्रैंचाइज़ी नहीं है।
  • डीलरशिप: आप कंपनी से माल खरीदकर अपने इलाके में बेचते हैं।
  • डिस्ट्रीब्यूटरशिप: आप स्टॉक रखते हैं और दुकानदारों को माल पहुँचाते हैं।
  • एजेंसी या बिज़नेस कॉरेस्पोंडेंट: आप कंपनी या बैंक की ओर से काम करते हैं और कमीशन कमाते हैं।

आपको क्या-क्या देना होता है

खर्च हर ब्रांड में अलग होता है। फ़ैसला करने से पहले हर खर्च की एक लिखित सूची माँगें। मुँह-ज़बानी कुल रकम पर भरोसा न करें।

  • फ़्रैंचाइज़ी शुल्क: ब्रांड इस्तेमाल करने के अधिकार के लिए एक बार का भुगतान।
  • रॉयल्टी: नियमित भुगतान, अक्सर बिक्री का हिस्सा या तय रकम।
  • मार्केटिंग शुल्क: ब्रांड के विज्ञापन के लिए भुगतान।
  • सिक्योरिटी डिपॉज़िट: ब्रांड के पास रखी रकम। पूछें कि यह कब और कैसे लौटेगी।
  • फ़िट-आउट: दुकान का डिज़ाइन, फ़र्नीचर, उपकरण और साइनबोर्ड।
  • स्टॉक: माल की पहली खेप।
  • वर्किंग कैपिटल: किराया, वेतन, बिजली और बिलों के लिए पैसा, जब तक दुकान कमाने न लगे।

फ़ीस पर टैक्स

फ़्रैंचाइज़ी शुल्क और रॉयल्टी सेवा के बदले भुगतान हैं, और इन पर GST लग सकता है। दर और कोड बदल सकते हैं। अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से पूछें और ब्रांड से हर बिल में GST अलग दिखाने को कहें।

अगर कोई ब्रांड सही बिल के बिना भुगतान माँगे, तो इसे चेतावनी मानें।

क्या यह आपके लिए सही है?

फ़्रैंचाइज़ी में आपको जाना-पहचाना नाम और आज़माया हुआ तरीका मिलता है। साथ में शुल्क, नियम और कम आज़ादी भी मिलती है। मशहूर नाम से मुनाफ़े की गारंटी नहीं मिलती।

कोई भी भुगतान करने से पहले इस साइट की दूसरी गाइड पढ़ें।

स्रोत (1)
  1. Indian Contract Act, 1872 (India Code) · 1872

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