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गाइड 06 · 7 मिनट

चेतावनी के संकेत और फ़र्ज़ी डीलरशिप ठगी

बड़े ब्रांड के नाम पर फ़र्ज़ी डीलरशिप के प्रस्ताव आम हैं, इसलिए आधिकारिक वेबसाइट पर जाँचें और निजी खाते में कभी पैसा न भेजें।

ठगी कैसे होती है

ठगी आम तौर पर किसी विज्ञापन, SMS, ईमेल या सर्च रिज़ल्ट से शुरू होती है जो किसी मशहूर कंपनी का प्रस्ताव लगता है। इसमें कंपनी का लोगो और नकल की हुई वेबसाइट हो सकती है।

आपसे रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग, सिक्योरिटी या "वापस होने वाली" फ़ीस माँगी जाती है। पैसा देने के बाद संपर्क बंद हो जाता है या नई फ़ीस माँगी जाती है।

आधिकारिक चेतावनियाँ

पेट्रोल और LPG: इंडियन ऑयल ने कहा है कि अनजान लोग या फ़र्ज़ी एजेंसियाँ नकली पत्र और ईमेल भेजकर LPG वितरक और रिटेल आउटलेट डीलरशिप का प्रस्ताव देती हैं और पैसे माँगती हैं। उसने नकल की गई वेबसाइटों के नाम भी बताए हैं। PIB फ़ैक्ट चेक ने भी फ़र्ज़ी LPG डीलरशिप प्रस्तावों पर चेतावनी दी है।

अमूल: अमूल की मालिक संस्था GCMMF ने बताया कि फ़र्ज़ी वेबसाइटें अमूल पार्लर फ़्रैंचाइज़ी के नाम पर रजिस्ट्रेशन फ़ीस लेती थीं। अमूल के अनुसार उसके पार्लर की प्रक्रिया केवल GCMMF चलाती है।

मोबाइल टावर: दूरसंचार विभाग का कहना है कि वह मोबाइल टावर के लिए कोई अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी नहीं करता। सितंबर 2024 में PIB फ़ैक्ट चेक ने एग्रीमेंट फ़ीस माँगने वाले एक नोटिस के खिलाफ़ चेतावनी दी।

पतंजलि और जियो: हमें इनके लिए ऐसी आधिकारिक सूचना नहीं मिली जिसका लिंक यहाँ दे सकें, इसलिए हम कोई दावा नहीं करते। हर ब्रांड पर यही जाँचें अपनाएँ।

खतरे के संकेत

इनमें से कोई एक भी संकेत हो तो रुकें और जाँच करें।

  • आवेदन करने, फ़ॉर्म लेने या शॉर्टलिस्ट होने के लिए पैसे माँगे जा रहे हैं।
  • भुगतान किसी व्यक्ति के निजी बैंक खाते, वॉलेट या UPI आईडी में माँगा जा रहा है।
  • प्रस्ताव में हर महीने तय आमदनी या जल्दी मुनाफ़े की गारंटी है।
  • ईमेल Gmail जैसे मुफ़्त पते से आया है, या वेबसाइट का नाम असली नाम से थोड़ा अलग है।
  • कहा जा रहा है कि आज ही फ़ैसला करें वरना मौका चला जाएगा।
  • ब्रांड खर्च की लिखित सूची, एग्रीमेंट का मसौदा या मौजूदा फ़्रैंचाइज़ी के नाम नहीं दे रहा।
  • बड़ा ब्रांड आपकी लगभग कोई जाँच किए बिना डीलरशिप दे रहा है।

गारंटी वाली कमाई

कोई ईमानदार ब्रांड आपके मुनाफ़े की गारंटी नहीं दे सकता। बिक्री आपके शहर, आपकी दुकान और आपकी मेहनत पर निर्भर करती है। "पक्की आमदनी" या "बिल्कुल जोखिम नहीं" जैसे शब्दों से सावधान रहें।

आँकड़े लिखित में माँगें और पूछें कि वादा पूरा न हुआ तो ज़िम्मेदार कौन होगा।

ब्रांड की जाँच कैसे करें

कंपनी की वेबसाइट का पता खुद टाइप करें। SMS या विज्ञापन के लिंक पर क्लिक न करें। वहीं फ़्रैंचाइज़ी या डीलरशिप का पेज और संपर्क जानकारी देखें।

आधिकारिक साइट पर दिए मुख्य कार्यालय के नंबर पर फ़ोन करें। पूछें कि आपसे संपर्क करने वाला व्यक्ति वहाँ काम करता है या नहीं। तेल कंपनियों के मामले में उनका एरिया ऑफ़िस डीलरशिप के कागज़ की पुष्टि कर सकता है।

देखें कि ब्रांड का नाम पंजीकृत ट्रेडमार्क है या नहीं। भारत सरकार के सार्वजनिक ट्रेडमार्क रिकॉर्ड में खोजें और कंपनी को कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की साइट पर देखें।

अगर आप पैसा दे चुके हैं

तुरंत अपने बैंक को फ़ोन करें और भुगतान रोकने या चिह्नित करने को कहें। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर और हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें। स्क्रीनशॉट, चैट, रसीदें और खाते की जानकारी सँभालकर रखें।

पहली रकम "वापस दिलाने" के नाम पर और पैसा न दें। वह दूसरी ठगी है।

स्रोत (7)
  1. Indian Oil Corporation: notices on fake dealership offers · 2026
  2. Moneylife: Government cautions against fake ads on petroleum dealerships · 2018
  3. Amul press note on curbing fake websites · 2020
  4. Business Today: Amul sends legal notice to Google India over fake websites · 2019
  5. All India Radio: PIB Fact Check Unit warns against mobile tower installation fraud · 2024
  6. Public advisory on frauds related to installation of mobile tower (DoT, via Vikaspedia) · 2020
  7. National Cyber Crime Reporting Portal · 2026

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